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Tuesday, July 27, 2021

"खुशी"

             

अपना वजूद भी इस दुनिया का एक हिस्सा है उस पल को

महसूस करने की खुशी , आसमान को आंचल से बाँध

लेने का  हौंसला , आँखों में झिलमिल -झिलमिलाते  सपने

और आकंठ हर्ष आपूरित आवाज़ - “ मुझे नौकरी मिल गई है , कल join करना है वैसे कुछ दिनों में exam भी हैं…,

 पर मैं सब संभाल लूंगी।” कहते- कहते उसकी आवाज

शून्य में खो सी गई ।

 मुझे खामोश देख वो फिर चहकी - “ मुझे पता है 

आप अक्सर मुझे लेकर चिन्तित होती हो , मैंने सोचा सब

से पहले आप से खुशी बाँटू। “

           उसकी बात सुनते हुए  मैं सोच रही थी अधूरी पढ़ाई ,

गोद में बच्चा ,घर की जिम्मेदारी और ढेर सारे सामाजिक

दायित्व । ये भी नारी का एक रुप है कभी बेटी , कभी पत्नी

तो कभी जननी । हर रूप में अनथक परिश्रम करती है और

अपना अस्तित्व कायम रखने के लिए अवसर की तलाश

में रहती है ।अवसर मिलते ही पल्लवित होती है अपनी  पूर्ण सम्पूर्णता के साथ।

                उसके  दमकते चेहरे और बुलन्द हौंसलों को

देखकर मुझे बेहद खुशी हुई और यकीन हो गया कि एक

दिन फिर वह निश्चित रूप सेे इस से भी बड़ी खुशी मुझसे

बाँट कर मुझे चौंका देगी ।

          

                                ***

Sunday, July 4, 2021

"महिला दिवस"

 चार-पाँच औरतें खिलखिलाती हुई होटल में लंच हॉल  में घुसी और कोने में व्यवस्थित सीटिंग व्यवस्था पर जा बैठी । शायद "रिजर्व" की तख्ती पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं थी किसी के पास । सभी अपने अपने लुक्स पर फिदा थी और एक -दूसरे से ज्यादा सलीकेदार जताने की कोशिश में लगी थी तभी एक वेटर ने टेबल के पास आ कर अदब से सिर झुकाते हुए विनम्रता से कहा-"यह टेबल रिजर्व है मैम ,मैं आप लोगों के लिए दूसरी तरफ व्यवस्था कर देता हूँ ।"

"दूसरी तरफ क्यों ? जो नहीं आए उनके लिए भी तो व्यवस्था कर सकते हो ।" एक महिला ने रौब के साथ वेटर को लगभग झिड़कते हुए कहा ।

स्थिति की गंभीरता देख कर मैनेजर उनको दूसरी तरफ बैठाने की व्यवस्था का निर्देश देकर आगे बढ़ा

 ही था कि तीन लड़के और दो लड़कियों का समूह कंधों पर बैग लटकाए बिखरे बालों और अस्त-व्यस्त कपड़ों और लस्त-पस्त हालत में अपनी रिजर्व टेबल की ओर आगे बढ़ा । बैठने से पूर्व उनके चेहरों पर परेशानी और व्यग्रता साफ दिखाई दे रही थी ।

सीटों की अदला-बदली में कुछ पल की भिनभिनाहट जरूर हुई पर अन्तत: सब तरफ शांति थी और हल्के संगीत के साथ माहौल खुशनुमा । उधर महिलाएं दूसरी टेबल पर बैठ कर अपने

बिगड़े हुए मूड को ठीक करने के प्रयास में लगी थीं । ड्रेसस् और मेकअप के बारे में एकबारगी भूल अब उनके चर्चा का विषय टेबल पर बैठे युवक-युवतियों का समूह था । 

 "घर में यह 'शो' करेंगे बेचारों को समय ही नहीं मिलता । यहाँ क्या गुलछर्रे  उड़ रहे हैं । हम तो ऐसा सोच भी नहीं सकते थे ।" - किसी ने गहरी सांस भरते हुए कहा ।

"सच कहा तुमने आजादी तो इन्हीं के पास है । हमने तो घर-गृहस्थी की  चक्की में झोंक दिया खुद

 को ।"- दूसरी ने मानो बात पूरी की ।

"यार सेलिब्रेट करने आए हैं छोड़ो ये सब मूड मत ऑफ करो ।" उन्हीं में से एक ने विषय बदलने की कोशिश की ।

      पहली टेबल पर किसी प्रोजेक्ट की सक्सेस में आने वाली टेक्निकल प्रॉब्लम्स पर चर्चा के साथ स्टार्टरस की प्लेटें भी  साफ हो रही थी शायद भूख अपने चरम पर थी । तभी उनमें से एक लड़की ने माथे पर हाथ मारा - ओ शिट् .., मैं तो भूल गई थी । आधे घंटे में मेरी "वन ऑन वन" है । मैं जाती हूँ ,

तुम लोग लंच इंजॉय करो…,

"ठहर मैं भी चलती  हूँ ।" दूसरी ने फ्रेंच फ्राईज़ मुँह में लगभग ठूंसते हुए बैग उठाया ।

"यार इन लोगों का तो हो गया "महिला दिवस" 

बस ..,ट्रफिक ना मिले और ये पहुंच जाए टाईम 

से ।" - एक लड़के ने चिंता जताई । बाकी दो की आँखों में भी वहीं थी ।

चीयर्स !!! हैप्पी वीमन्स डे !!

 दूसरी टेबिल से ठहाका गूंजा । शायद वहाँ खाने से पूर्व ड्रिंक्स आ गईं थीं ।

पहली टेबिल पर खामोशी पसरी थी । 


***